देहरादून, : पीचडी चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (पीएचडीसीसीआई) ने विकास आयुक्त (एमएसएमई) कार्यालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से देहरादून में राष्ट्रीय स्तर के आईपी यात्रा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पर आधारित यह दो दिवसीय कार्यशाला देहरादून में 26 एवं 27 फरवरी 2026 को आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य एमएसएमई, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं एवं उद्यमियों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता एवं व्यावहारिक समझ को बढ़ावा देना है।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में श्री गणेश जोशी, माननीय मंत्री, कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग, उत्तराखंड सरकार उपस्थित रहे। उन्होंने उत्तराखंड राज्य में इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु पीएचडीसीसीआई को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप बौद्धिक संपदा अधिकारों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने उत्तराखंड की कृषि एवं उद्योग सहित विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में मजबूत नवाचार क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसे एक ही दिन में 18 जीआई (Geographical Indications) प्राप्त हुए, जो देश में सर्वाधिक संख्या है। उन्होंने स्टार्टअप एवं उद्यमिता विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए उत्तराखंड के पारंपरिक कृषि उत्पादों जैसे मिलेट्स (मंडुवा/रागी), झंगोरा, लाल चावल, राजमा एवं हल्दी के लिए जीआई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीआई मान्यता उत्पाद की प्रामाणिकता की रक्षा करती है, ब्रांड मूल्य को सुदृढ़ करती है तथा बेहतर बाजार उपलब्धता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होती है।
इस अवसर पर श्री विनीत गुप्ता , अध्यक्ष, पीएचडीसीसीआई उत्तराखंड चैप्टर ने भी संबोधित करते हुए राज्य में सशक्त आईपी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम में डॉ. राजेन्दर डोभाल, कुलपति, स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी; श्री डी पी गोयल , सह-अध्यक्ष, एमएसएमई समिति, पीएचडीसीसीआई; डॉ. एच पी कुमार, पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनएसआईसी एवं सलाहकार, पीएचडीसीसीआई; तथा श्रीअमित खनेजा , सह-अध्यक्ष, पीएचडीसीसीआई उत्तराखंड चैप्टर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने नवाचार को बढ़ावा देने तथा उद्यमों एवं संस्थानों में बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस में आईपीआर की रूपरेखा, पेटेंट पंजीकरण प्रक्रिया, एमएसएमई के लिए रणनीतिक आईपी प्रबंधन, पेटेंट सूचना विश्लेषण, वाणिज्यीकरण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे विषयों पर केंद्रित तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। कार्यक्रम 27 फरवरी को पेटेंट विरोध, उल्लंघन, आईपीआर प्रवर्तन तथा आईपीआर हेल्पडेस्क कैंप के साथ जारी रहेगा, जिसमें प्रतिभागियों को एक-से-एक मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
आईपी यात्रा कार्यक्रम के माध्यम से पीएचडीसीसीआई नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा हितधारकों को अपनी बौद्धिक संपदा की प्रभावी सुरक्षा एवं उपयोग के लिए सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।

