देहरादून : होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (HMSI) ने देशभर में रोड सेफ्टी को लेकर कई जागरूकता-केंद्रित पहलें आयोजित कीं। इन गतिविधियों के लिए कंपनी ने अपने डीलर नेटवर्क और स्थानीय स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर सुरक्षित सड़क व्यवहार और ट्रैफिक नियमों की बेहतर समझ को बढ़ावा दिया। पूरे महीने के दौरान, देश के विभिन्न शहरों में सड़क सुरक्षा से जुड़ी जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 30,000 से अधिक लोगों की भागीदारी रही।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत अपनी पहलों के हिस्से के रूप में, एचएमएसआई ने जयपुर आइडियल रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट भी लॉन्च किया, जो सुरक्षित और जिम्मेदार मोबिलिटी की दिशा में कंपनी के फोकस को दर्शाता है। यह प्रोजेक्ट एक समग्र अप्रोच अपनाता है, जिसमें एजुकेशन, एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को स्कूलों, ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के सहयोग से रोज़मर्रा के सामुदायिक जीवन में जोड़ा गया है। इस पहल का फोकस जागरूकता और ट्रेनिंग, बेहतर सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर, चिन्हित ज़ोन्स में सख्त अनुपालन और क्रिटिकल लोकेशंस के विश्लेषण पर है। फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स की बेहतर तैयारी के जरिए यह पहल दुर्घटनाओं को कम करने और जीवन बचाने का लक्ष्य रखती है, साथ ही एक अधिक जिम्मेदार, तैयार और सेफ्टी-कोंशियस समुदाय का निर्माण करती है, जो देशभर के शहरों के लिए एक मॉडल बन सकता है।
रोड सेफ्टी रैली, समिट, हेलमेट वितरण, मासिक सड़क सुरक्षा अभियान और अन्य एंगेजमेंट गतिविधियों सहित सभी जागरूकता कार्यक्रमों का फोकस ट्रैफिक नियमों, राइडर की जिम्मेदारी और प्रोटेक्टिव राइडिंग प्रैक्टिसेज़ की अहमियत को लेकर प्रैक्टिकल लर्निंग पर रहा। इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोड सेफ्टी संदेश को आगे बढ़ाना था, ताकि समुदाय की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस दौरान राइडिंग बिहेवियर और ट्रैफिक नियमों की समझ को लेकर चर्चा की गई, जिसमें ट्रैफिक रेगुलेशंस के सख्त पालन पर विशेष जोर दिया गया।
एचएमएसआई ने महिला राइडर्स के बीच आत्मविश्वास और तैयारियों को बढ़ावा देने के लिए महिला रोड सेफ्टी रैली भी आयोजित की। इस दौरान उन्हें हेलमेट भी वितरित किए गए, ताकि राइडिंग के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया जा सके। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, एचएमएसआई की निरंतर चलने वाली रोड सेफ्टी पहलों का एक अहम हिस्सा है। इसके अलावा, कंपनी हर महीने नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है और ट्रैफिक ट्रेनिंग पार्क्स (TTPs) व सेफ्टी ड्राइविंग एजुकेशन सेंटर्स (SDECs) में लगातार गतिविधियों के जरिए यह सुनिश्चित करती है कि सड़क सुरक्षा शिक्षा एक बार की पहल न होकर निरंतर चलने वाला प्रयास बनी रहे।
इन सभी सामूहिक पहलों के माध्यम से एचएमएसआई अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर देशभर में राइडर्स, पैदल यात्रियों और समुदायों के लिए सुरक्षित सड़कों की दिशा में लगातार काम कर रहा है। अपनी वैश्विक सेफ्टी टैगलाइन “Safety for Everyone” से प्रेरित होकर, होंडा उस भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जहां मोबिलिटी और सुरक्षा साथ-साथ आगे बढ़ें। एजुकेशन और शुरुआती स्तर पर जागरूकता के जरिए कंपनी कम उम्र से ही रोड सेफ्टी के प्रति समझ विकसित कर रही है, ताकि एक पीढ़ीगत बदलाव को बढ़ावा दिया जा सके, जहां सुरक्षित आदतें स्वाभाविक बन जाएं। साल 2021 में होंडा ने 2050 तक होंडा मोटरसाइकिल्स और ऑटोमोबाइल्स से जुड़े ट्रैफिक हादसों में शून्य मृत्यु का लक्ष्य रखने वाली अपनी ग्लोबल विज़न की घोषणा की थी। भारत में एचएमएसआई इस विज़न के साथ-साथ भारत सरकार के 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य के अनुरूप काम कर रहा है।
होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया की सड़क सुरक्षा के प्रति सीएसआर प्रतिबद्धता:
2021 में होंडा ने वर्ष 2050 के लिए अपना वैश्विक विज़न स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें उसने होंडा के दोपहिया और चारपहिया वाहनों से जुड़े सड़क हादसों में शून्य मृत्यु दर प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया। भारत में एचएमएसआई इस विज़न के अनुरूप कार्य कर रहा है और भारत सरकार के उस दिशा-निर्देश के साथ भी कदम मिला रहा है, जिसके तहत 2030 तक सड़क हादसों में मृत्यु दर को आधा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने का एक अहम पहलू यह है कि 2030 तक बच्चों में सड़क सुरक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की जाए और उसके बाद भी उन्हें निरंतर शिक्षित किया जाए। स्कूलों और कॉलेजों में दी जाने वाली सड़क सुरक्षा शिक्षा का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं है, बल्कि युवाओं के मन में सुरक्षा की संस्कृति को विकसित करना है, ताकि वे भविष्य में सड़क सुरक्षा के सशक्त प्रतिनिधि बन सकें। यह शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को ज़िम्मेदार नागरिक बनने के लिए सशक्त बनाती है और उन्हें एक सुरक्षित समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।
एचएमएसआई का उद्देश्य है कि वह ऐसी कंपनी बने जिसके अस्तित्व की समाज को आवश्यकता महसूस हो। इस दिशा में एचएमएसआई सड़क सुरक्षा जागरूकता को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। स्कूल के बच्चों से लेकर कॉर्पोरेट्स और व्यापक समाज तक हर वर्ग के लिए एचएमएसआई विशेष और अनोखी पहलें तैयार कर रहा है, ताकि हर व्यक्ति को उसकी ज़रूरत
और समझ के अनुसार सड़क सुरक्षा की जानकारी दी जा सके। यह समावेशी दृष्टिकोण एचएमएसआई को एक ज़िम्मेदार और समाज-केंद्रित संगठन के रूप में स्थापित करता है।
एचएमएसआई के प्रशिक्षित सड़क सुरक्षा प्रशिक्षक देशभर में फैले 10 ट्रैफिक ट्रेनिंग पार्क (टीटीपी) और 6 सेफ्टी ड्राइविंग एजुकेशन सेंटर्स (एसडीईसी) में रोज़ाना कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सड़क सुरक्षा शिक्षा को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना है। अब तक यह पहल 10 मिलियन से अधिक भारतीयों तक पहुँच चुकी है। एचएमएसआई का राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम सीखने की प्रक्रिया को रोचक और वैज्ञानिक बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत वर्चुअल राइडिंग सिमुलेटर, इंटरैक्टिव गेम्स और खतरे की पहचान पर आधारित प्रशिक्षण जैसे आधुनिक तरीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक और प्रभावशाली अनुभव प्राप्त होता है। यह समग्र दृष्टिकोण सड़क सुरक्षा को व्यवहार में लाने और समाज में जिम्मेदार यातायात संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया शिक्षण मॉड्यूल: होंडा के दक्ष प्रशिक्षक सड़क सुरक्षा की मजबूत नींव रखने के लिए थ्योरी सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षण की शुरुआत करते हैं। इन सत्रों में प्रतिभागियों को सड़क संकेत और चिन्हों की जानकारी, सड़क पर चालक की जिम्मेदारियाँ, सुरक्षित सवारी के लिए उपयुक्त गियर और बैठने की मुद्रा, तथा सुरक्षित और शिष्ट सवारी व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से समझाया जाता है। यह संरचित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रतिभागियों को न केवल जागरूक बनाता है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और सतर्क यात्री बनने के लिए प्रेरित भी करता है।
1. प्रायोगिक प्रशिक्षण: एक विशेष प्रशिक्षण गतिविधि के तहत प्रतिभागियों को होंडा के वर्चुअल राइडिंग सिमुलेटर पर अभ्यास कराया गया, जिसमें उन्होंने सड़क पर सवारी से पहले 100 से अधिक संभावित खतरों का अनुभव किया। यह तकनीक उन्हें वास्तविक परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।
2. इंटरैक्टिव सत्र: प्रतिभागियों को किकेन योसोकु ट्रेनिंग (KYT) के माध्यम से खतरे की पहचान और पूर्वानुमान का प्रशिक्षण दिया गया। यह तकनीक चालक की संवेदनशीलता को बढ़ाती है और सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग व्यवहार सुनिश्चित करती है।
3. मौजूदा चालकों के कौशल को निखारना: स्कूलों के छात्र और स्टाफ सदस्य जो पहले से ही वाहन चलाते हैं, उन्होंने धीमी गति से सवारी करने की गतिविधियों और संकीर्ण पट्टियों पर संतुलन साधने जैसे अभ्यासों के माध्यम से अपने राइडिंग कौशल को और बेहतर बनाया।
एचएमएसआई ने हाल ही में अपना डिजिटल रोड सेफ्टी लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म ई-गुरुकुल लॉन्च किया है। यह एक इंटरैक्टिव और यूज़र-फ्रेंडली प्लेटफ़ॉर्म है, जो 5 से 18 साल तक के बच्चों के लिए तीन अलग-अलग एज ग्रुप्स में तैयार किए गए ट्रेनिंग मॉड्यूल्स ऑफर करता है। ई-गुरुकुल फिलहाल कन्नड़, मलयालम, हिंदी, तेलुगु, तमिल और अंग्रेज़ी भाषाओं में उपलब्ध है, ताकि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले बच्चे इसे आसानी से समझ सकें। इस प्लेटफ़ॉर्म को gurukul.honda.hmsi.in पर एक्सेस किया जा सकता है। इसमें लाइव स्ट्रीमिंग और डाउनलोडिंग दोनों ऑप्शन हैं, जिससे कंटेंट को कहीं भी, कभी भी देखा जा सकता है। इस पहल का मकसद बच्चों, टीचर्स और डीलर्स को रोड सेफ्टी के लिए तैयार करना है, ताकि वे आगे चलकर सुरक्षित ड्राइविंग के एंबेसडर बन सकें।
एचएमएसआई इस प्रोग्राम को देश के हर राज्य के स्कूलों तक ले जाने की योजना बना रहा है, जिससे हर उम्र के बच्चों को उनकी ज़रूरत के मुताबिक रोड सेफ्टी की जानकारी दी जा सके। अगर कोई स्कूल इस जानकारी को पाना चाहता है, तो वह Safety.riding@honda.hmsi.in पर संपर्क कर सकता है।

